Birth Annivesary: प्रयाग ने गूढ़ किया दुष्यंत के शब्दों का संसार, AU में पढ़ते आ गया था विद्रोही स्वभाव

शरदद्विवेदी,प्रयागराज।मेरेसीनेमेंनहींतोतेरेसीनेमेंसही,होकहींभीआग,लेकिनआगजलनीचाहिए।दुष्यंतकुमारकीउक्तपंक्तियांजनमानसकीअंतरात्माझकझोरनेकेसाथउनकेसत्तासेटकरानेकेजज्बेकोभीप्रदर्शितकरतीहैं।हिंदीकेकवि,कथाकारवगजलकारदुष्यंतकुमारकाविद्रोहीतेवर,बेलौसअंदाजउनकीपहचानहै।वेनेताओंकीवादाखिलाफीसेइतनेव्यथितथेकिशब्दोंकेजरिएसत्तापरचोटकरनेलगे।दुष्यंतकेशब्दोंकोतेवरप्रयागमेंमिला।एकसितंबर1933कोबिजनौरकेराजपुरनवादागांवमेंजन्मेदुष्यंतकुमारकेपिताभगवतसहायत्यागीकासपनाथाकिवो(डिप्टीकलेक्टर)बने।उनकादाखिलाइलाहाबादविश्वविद्यालयमेंकराया,लेकिनप्रयागराजआनेपरउनकेजीवनमेंदिशाबदलगई।

पढ़ाईकेदौरानकमलेश्वरऔरमार्कंडेयउनकेमित्रबनगए

हिंदुस्तानीएकेडेमीकेपूर्वकोषाध्यक्षसमालोचकरविनंदनसिंहबतातेहैंकिदुष्यंतकुमार1954मेंइविसेहिंदीमेंएमएकररहेथे।पढ़ाईकेदौरानकमलेश्वरऔरमार्कंडेयउनकेमित्रबनगए।तीनों'त्रिशूलकेनामसेविख्यातथे।दुष्यंतकुमारपरिमलतथाप्रगतिशीललेखकसंघदोनोंखेमोंकीगोष्ठियोंमेंभागलेतेथे।इविछात्रकेरूपमेंउन्हेंपीसीबीछात्रावासकाकमरानंबर87मिलाथा।

नहींनिकालसकेपत्रिका

दुष्यंतनेकमलेश्वरऔरमार्कंडेयकेसाथमिलकर'विहाननामकपत्रिकानिकाली।पत्रिकाकापहलाअंकनिकला,लेकिनआगेनहींनिकलसकी।

वरिष्ठसाहित्यकारप्रो.राजेंद्रकुमारकेअनुसारदुष्यंतकुमारशब्दोंसेबगावतीथे,लेकिनअसलजिंदगीमेंउनकास्वभावसरलथा।उनकीसाहित्यिकरुचिकाकेंद्रप्रयागराजहीथा।प्रयागराजमेंउपन्यासछोटे-छोटेसवाल,आंगनमेंएकवृक्षऔरदोहरीजिंदगीऔरकाव्यसंग्रह'सूर्यकास्वागतÓलिखाथा,जबकिकाव्यनाटक'एककंठविषपायीÓकालेखनशुरूकियाथा।

बंधनोंसेथेमुक्त

वरिष्ठकथाकारडा.कीर्तिकुमारसिंहकहतेहैंकिदुष्यंतकुमारकोबंधनस्वीकारनहींथा।साहित्यकारोंकेअलग-अलगखेमोंमेंजाकरबैठतेजरूरथेलेकिनकभीकिसीकेअधीननहींहुए।