जामनी खेड़ा के सिपाही सतीश कुमार जम्मू कश्मीर में हुए शहीद

संवादसहयोगी,नारनौंद:जामनीखेड़ानिवासीबीएसएफमेंहेडकांस्टेबलसतीशकुमारजम्मूकश्मीरमेंबर्फीलेतूफानमेंफंसनेकेकारणशहीदहोगए।उनकापार्थिवशरीरमंगलवारकोउसकेपैतृकगांवमेंलायाजाएगाऔरपूरेराजकीयमानसम्मानकेसाथउनकाअंतिमसंस्कारकियाजाएगा।इससूचनासेपूरेगांवमेंगमकामाहौलहै।

जामनीखेड़ानिवासी47वर्षीयसतीशकुमारपुत्रप्रेमसिंह12वींकक्षाकीपढ़ाईपूरीकरके1993मेंबीएसएफमेंसिपाहीभर्तीहोगयाथा।उसनेबचपनसेहीसोचाथाकिवहसेनामेंभर्तीहोकरदेशकीसेवाकरेगावहसेनामेंभर्तीहोकरकाफीखुशथाऔरसन1994मेंउसकीशादीसुनीताकेसाथहोगईथी।इनदिनोंसतीशकुमारकीपोस्टिगजम्मूकश्मीरमेंथीऔरवहड्यूटीकेदौरानचारसिपाहियोंकेसाथबर्फीलीचोटीपरड्यूटीकररहाथाऔरड्यूटीकरनेकेबादजबवहवापिसचोटीसेनीचेआरहेथेतोवहएकबर्फीलेतूफानमेंफंसगएऔरवहींपरगिरगएचारोंसिपाहियोंकोढूंढकरनीचेलायागयाऔरउनकोइलाजकेलिएसेनाकेहॉस्पिटलमेंभर्तीकरवायागया।लेकिनसतीशकुमारनेइलाजकेदौरान31जनवरीकोदमतोड़दिया।औरवोदेशकेलिएशहीदहोगए।उनकेपार्थिवशरीरकोजम्मूकश्मीरसेहवाईजहाजमेंदिल्लीएयरपोर्टपरमंगलवारकीरातकोलायाजाएगाऔरबुधवारकीसुबहदिल्लीएयरपोर्टसेउनकोपैतृकगांवजामड़ीखेड़ामेंलायाजाएगा।जहांपरउनकाअंतिमसंस्कारपूरेमान-सम्मानकेसाथकियाजाएगा।

------------पांचमहीनेपहलेपिताकीमौतपरआयाथागांव,अबबेटीकीशादीकेलिएइसीमहीनेआनाथा

सुनीलमान,नारनौंद:जामनीखेड़ानिवासीशहीदसतीशकुमारकरीबछहमहीनेपहलेअपनेपिताकीमौतपरशोकजतानेकेलिएगांवमेंआयाथाऔरजातेसमयअपनेस्वजनोंकोयहकहकरगयाथाकिअबउसकोबेटीकीशादीकरनीहै।फरवरीमेंछुट्टीलेकरआएगाऔरअच्छासालड़कादेखकरअपनीबेटीकेहाथपीलेकरकेवापससेनामेंजाएगा।लेकिनउसकायहसपनाअधूरारहगया।इसघटनासेपूरेगांवमेंशोककीलहरदौड़गईऔरपरगांवमेंकिसीभीघरमेंचूल्हानहींजला।

शहीदसतीशकुमारसेनामेंभर्तीहोकरकाफीखुशथाउसकीशादी1994मेंसुनीताकेसाथहुईथीसुनीताग्रहणीहैऔरघरपररहकरहीअपनेबच्चोंकोशिक्षितकरनेमेंलगीरहतीहै।पिताकासपनाथाकिउसकेदोनोंबच्चेऊंचेपदपरकार्यरतहो।इसीकोलेकरउसनेअपनीपत्नीवदोनोंबच्चोंकोरोहतकमेंशिफ्टकरदियाथाऔरवहींपरउनकीपढ़ाईचलरहीथी।उनकीबड़ीबेटीरितुबीएकीपढ़ाईपूरीकरकेकोचिगलेरहीथीतोबेटारितिक12वींकक्षाकीपढ़ाईकरनेमेंजुटाहुआथा।पांचमहीनेपहलेसतीशकेपिताप्रेमसिंहकीमृत्युहोगईथीऔरवहउसीसमयछुट्टीलेकरगांवमेंआयाथा।छुट्टीपूरीकरनेकेबादजबवहसेनामेंजारहाथातोस्वजनोंसेकहाथाकिअबवहफरवरीमहीनेमेंछुट्टीआएगाऔरउसकेबादएकअच्छासालड़कादेखकरवहअपनीबेटीरितुकेहाथपीलेकरेगा।लेकिनउसकायहसपनाअधूरारहगया।शहीदसतीशकुमारकीमाता90वर्षीयमाधोदेवीआजभीअपनेबेटेकीटकटकीलगाकरइंतजारकररहीहैकिउसकाबेटाकबगांवमेंवापिसआएगा।जैसेहीगांववालोंकोसूचनामिलीतोपूरेगांवमेंशोककीलहरदौड़गईऔरकिसीभीघरमेंचूल्हानहींजलागांवकेकाफीबुजुर्गोंकीआंखोंमेंआंसूथेक्योंकिजबभीवहछुट्टीआताथातोबुजुर्गोंकेपासबैठकरउनकोसेनाकीकहानीसुनाताथा।