सूर्य को अ‌र्घ्य देकर की सुख शांती की कामना

संवादसूत्रहेडिआया,बरनाला:कस्बाहंडिआयामेंछठपूजाकात्योहारश्रद्धासेमनायागया।छठपूजाकात्योहारदेशकेपूर्वीप्रदेशमेंधूमधामसेमनायाजाताहै।रोजगारकेसिलसिलेमेंपंजाबसेआएपूर्वीराज्योंकेलोगोंकेकारणअबपंजाबमेंयहत्योहारश्रद्धावधूम-धामसेमनायाजानेलगाहै।दुनियामेंएकमशहूरकहावतहैकिहरकोईचढ़तेसूर्यकोनमनकरताहै,परंतुयहत्योहारछिपतेहुएसूर्यकीपूजाकरकेउसकोअ‌र्घ्यदियाजाताहै।

इसअवसरपरमहिलाओंद्वाराछठमाताकीपूजाकरतेहैवपरिवारकीसुखशांतीकीकामनाकरतेहैं।वैसेनदीयातालाबमेंलेजाकरसूर्यदेवताकीपूजाकीजातीहै,परन्तुअगरनजदीकऐसीजगहनहींहोनेकीसूरतमेंएकगड्ढाखोदकरउसमेंपानीभरकरअपनीआस्थाकानिर्वाहकरलियाजाताहै।इसअवसरपरराहुलकुमार,राकेशकुमार,रेखारानी,अविनाशकुमार,अनुकुमारी,राजन,प्रदीपकुमार,हरीशचंद,मनोजकुमार,सुरजीत¨सह,पूजाकुमारी,मीनारानीआदिश्रद्धालुउपस्थितथे।

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